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माता की शिक्षा #7

“शिकायत भरे हृदय से घमंड का जन्म होता है। जब हम हमेशा कृतज्ञता भरे हृदय से परमेश्वर की सेवा करेंगे, तब शिकायत और घमंड गायब हो जाएंगे, और हृदय नम्रता से भर जाएगा।”

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शिकायत का मतलब है, हमारे हृदय में असंतोष होना। जो लोग संतोष करना नहीं जानते, वे शिकायत करने लगते हैं। चाहे परमेश्वर कितनी भीअनुकूल परिस्थितियां तैयार करें, वे परमेश्वर को धन्यवाद देने के बजाय हमेशा पहले नकारात्मक पहलुओं को देखते हैं। माता ने कहा, “शिकायत भरे हृदय से घमंड का जन्म होता है।” हम शिकायत तब करते हैं जब हम सोचते हैं, ‘यह तरीका सही नहीं है,’ ‘मेरा तरीका उससे बहुत बेहतर है,’ या ‘उसे मेरे साथ ऐसा व्यवहार नहीं करना चाहिए।’ इन शिकायतों से, हमारे मन में अहंकार पैदा होता है और हम सोचने लगते हैं, ‘मैं सब से बेहतर हूं।’ चूंकि अहंकार हमारी आत्मा को विनाश की ओर ले जाता है, इसलिए हमें किसी भी परिस्थिति में शिकायत न करने के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए।

तब, शिकायत करने से बचने के लिए हमें क्या करना चाहिए? हमें हमेशा अपने हृदय में कृतज्ञता के साथ परमेश्वर की सेवा करनी चाहिए। शिकायत असंतोष से उत्पन्न होती है, और कृतज्ञता संतोष से आती है। हमने स्वर्ग में गंभीर पाप किए, जिसके कारण हमें इस पृथ्वी पर निकाल दिया गया। लेकिन, परमेश्वर ने हमारे अक्षम्य पाप को क्षमा किया और अपने बलिदान के द्वारा हमें उद्धार और अनन्त स्वर्ग का राज्य प्रदान किया। जब हम उनके अनुग्रह और आशीषों के बारे में सोचते हैं, तो हमें संतुष्ट रहना चाहिए और हमेशा सभी परिस्थितियों में परमेश्वर को धन्यवाद देना चाहिए। हमें न केवल अनुकूल परिस्थितियों में संतुष्ट रहना चाहिए जहां हम आसानी से धन्यवाद दे सकते हैं, बल्कि प्रतिकूल परिस्थितियों में भी संतुष्ट रहना चाहिए।

सदा आनन्दित रहो; निरन्तर प्रार्थना में लगे रहो; हर बात में धन्यवाद करो; क्योंकि तुम्हारे लिये मसीह यीशु में परमेश्वर की यही इच्छा है। 1थिस 5:16-18

हमें यह समझना चाहिए कि परमेश्वर हमें विभिन्न परिस्थितियों के माध्यम से निर्मल करके संपूर्ण प्राणी बना रहे हैं। यदि हम परमेश्वर की इच्छा को समझने में असफल रहते हैं और कुड़कुड़ाते हैं, तो हम न तो संपूर्ण हो सकेंगे और न ही स्वर्ग के राज्य में प्रवेश कर सकेंगे। हर चीज में, परमेश्वर की इच्छा होती है जो हमें स्वर्ग की ओर ले जाती है। यदि हम परमेश्वर की इस इच्छा को समझेंगे, तो हम शिकायत नहीं करेंगे, और एक दिन में हजार या दस हजार बार भी परमेश्वर के प्रति आभार व्यक्त करना पर्याप्त नहीं होगा। आइए हम हर परिस्थिति में परमेश्वर को धन्यवाद दें। जब हम ऐसा करें, तो माता के वचन के अनुसार शिकायत और घमंड हमारे भीतर से समाप्त हो जाएंगे, और हम एक नम्र हृदय के साथ नया जन्म लेंगे और परमेश्वर से भरपूर आशीषें प्राप्त करेंगे।