वे जो परमेश्वर की महिमा प्रकट करते हैं

58Views
Contents

मैं सिय्योन परिवार के उन सभी सदस्यों को हृदय से धन्यवाद देती हूं, जिन्होंने परमेश्वर के प्रेम और अनुग्रह को महसूस करके सुसमाचार के लिए पूरे मन से स्वयं को समर्पित किया है। मैं प्रार्थना करती हूं कि आप बहुतायत से पवित्र आत्मा प्राप्त करें और बहुत से सुंदर फल उत्पन्न करें।

सिय्योन की संतान परमेश्वर की इच्छा का पालन कर रही हैं और अपने अच्छे कार्यों के द्वारा परमेश्वर की महिमा प्रकट कर रही हैं। मसीह के इन वचनों का पालन करते हुए, “तुम जाओ और सब जातियों के लोगों को चेला बनाओ… और उन्हें सब बातें जो मैंने तुम्हें आज्ञा दी है, मानना सिखाओ,” वे पूरी दुनिया में भेजी जा रही हैं और मसीह आन सांग होंग का प्रकाश साहसपूर्वक चमका रही हैं। जब लोग इस प्रकाश को देखते हैं, तो परमेश्वर की अनमोल संतान उज्ज्वल रत्नों के समान सिय्योन की ओर उमड़ रही हैं(मत 28:18-20; यश 60:1-8)। जब हम पूरे मन से परमेश्वर की महिमा प्रकट करते हैं, तो प्रचुर फल स्वाभाविक रूप से उत्पन्न होते हैं। परमेश्वर की महिमा प्रकट होने के परिणामस्वरूप, अनेक आत्माएं सत्य की ओर मार्गदर्शित हो रही हैं। ये नए सदस्य भी पवित्र आत्मा से भरे हुए हैं और वे सुसमाचार को अपने तक ही सीमित नहीं रख सकते।

अब वे और भी अधिक उत्साह और स्पष्टता के साथ परमेश्वर की महिमा की गवाही दे रहे हैं। नए नियम में दर्ज विश्वास के नबियों में से प्रेरित पौलुस ऐसा व्यक्ति था जिसने पिता की महिमा को महान रूप से प्रकट किया। पौलुस ने स्वयं को क्रूस पर चढ़ा दिया, ताकि उसमें केवल मसीह ही जीवित रहें। उसने सांसारिक शक्ति, सम्मान, धन और ऐसी हर चीज़ को जो परमेश्वर के सुसमाचार के योग्य नहीं थी, कूड़ा समझा और स्वेच्छा से उन सब को त्याग दिया। केवल एक ही इच्छा के साथ कि जितना हो सके उतने अधिक लोगों को बचाया जाए, उसने स्वयं को एक दास के रूप में नम्र किया और पूरे हृदय से दूसरों की सेवा की(गल 2:20; 1कुर 9:19)।

चूंकि हम भी प्रेरित पौलुस की तरह धार्मिकता का मुकुट प्राप्त करने की आशा रखते हैं, इसलिए आइए हम उसके विश्वास के उदाहरण का अनुसरण करें। आइए हम सुसमाचार के लिए उत्पीड़न सहने और अपने भाई और बहनें के लिए बलिदान करने के लिए तैयार रहें(2तीम 4:1-8)। जब अहंकार हमारे अंदर जीवित रहता है, तो परमेश्वर की शिक्षाओं को पूरी तरह ग्रहण करना कठिन हो जाता है। अनजाने में, हम अपने भाई-बहनों के हृदय को प्रभावित करने के बजाय उन्हें चोट पहुंचा सकते हैं। इस युग में, बहुत से लोग परमेश्वर की खरी शिक्षाओं को ग्रहण करने के बजाय संसार की बातों की ओर अपने कान लगाते हैं। लेकिन हमें दिया गया समय सोने के समान बहुमूल्य है। आइए हम इसे व्यर्थ और अर्थहीन बातों का पीछा करने में बर्बाद न करें, बल्कि अपने पूरे हृदय, मन, शक्ति और आत्मा से परमेश्वर से प्रेम करें। जब हमारे पड़ोसी कष्टों और आपदाओं का सामना कर रहे हों, तो हम चुपचाप न देखें, बल्कि सच्चे प्रेम के साथ उनका मार्गदर्शन करें कि वे फसह मनाएं जिसके द्वारा परमेश्वर अनंत जीवन प्रदान करते हैं।

धार्मिकता के कारण सताए जाने और कठिनाइयों का सामना करने वालों का प्रतिफल बड़ा है(मत 5:10-12)। नूह ने जहाज बनाते समय बहुत उपहास और विरोध सहा। अब्राहम को भी परमेश्वर की इस आज्ञा का पालन करने से पहले कि वे अपने एकलौते पुत्र को बलि चढ़ाएं, अवश्य ही गहरी व्यथा और संघर्ष का सामना करना पड़ा होगा। मूसा मिस्र के सिंहासन का उत्तराधिकारी बनने की स्थिति में था, फिर भी उसने स्वर्गीय प्रतिफल की ओर देखते हुए इस्राएल के लोगों के साथ दुःख सहना चुना। उसी तरह, आइए हम भी ऐसे कार्य करें जो परमेश्वर को प्रसन्न करते हैं और उनका प्रतिफल प्राप्त करने के योग्य हैं।

राज-पदधारी याजकों के रूप में, स्वर्ग के राजकुमारों और राजकुमारियों का हृदय समुद्र के समान विशाल होना चाहिए। जब हम चोटिल भावनाओं या कड़वाहट को थामे रहते हैं, तो हम अनजाने में शैतान को अवसर दे सकते हैं, जो गरजनेवाले सिंह के समान इस खोज में फिरता रहता है कि किसे फाड़ खाए(1पत 5:8-9)। इसलिए, हर परिस्थिति में, आइए हम ठेस न खाने और आहत न बने रहने का प्रयास करें। जब ऐसी भावनाएं उठती हैं, तो यह इस बात का संकेत है कि हमारे भीतर अब भी “स्वयं” जीवित है और हमारा हृदय अभी तक पूरी तरह मसीह से भरा नहीं है। परमेश्वर की सन्तान वे हैं जो एक दूसरे की परवाह करते हैं, एक दूसरे को दिलासा देते हैं, और स्नेहपूर्ण और गर्मजोशी भरे शब्दों से एक दूसरे को प्रोत्साहित करते हैं। आइए हम हमेशा पिता के कष्टों और बलिदान को याद रखें, जिन्होंने हमारे लिए अपने प्राण तक दे दिए। जब कोई भाई या बहन हमारे हृदय को ठेस पहुंचाने वाली बात कहता है, तब भी यदि हम समझ, धैर्य, कोमलता और नम्रता से उत्तर दें, तो वह व्यक्ति गहराई से प्रभावित हो सकता है और स्वाभाविक रूप से बदलने लग सकता है। चूंकि प्रत्येक व्यक्ति को उसके कार्यों के अनुसार प्रतिफल मिलेगा, इसलिए आइए हम स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करते समय ‘दूसरों को प्रेरित करने का पुरस्कार’ प्राप्त करें(प्रक 22:11-12)। मुझे विश्वास है कि जो लोग परमेश्वर की महिमा को और अधिक प्रकट करते हैं, वे परमेश्वर से और भी अधिक पुरस्कार प्राप्त करेंगे।

जब हम परमेश्वर की आज्ञाओं का पालन करते हैं और अच्छे कर्मों के माध्यम से उसकी महिमा प्रकट करते हैं, तो कई बातें भविष्यवाणी के अनुसार घटित हो रही हैं: हम संसार में सिर बन रहे हैं, और जो कभी हमें परेशान करते थे, वे अब हमें सम्मान की दृष्टि से देख रहे हैं(व्य 28:1-14; यश 60:14-22)। कोरिया और विदेश दोनों में, हम निरंतर कई सुंदर रिपोर्टें सुन रहे हैं कि लोग परमेश्वर के लोगों की प्रशंसा करते हुए कहते हैं, “वे वास्तव में परमेश्वर के पुत्रों और पुत्रियों के रूप में जीवन जीते हैं।” सिय्योन के प्रिय सदस्यो, आइए हम पिता की महिमा को सामर्थ्यपूर्वक और बहुतायत से प्रकट करें। आइए हम एक-दूसरे के साथ एकजुट रहें, एक-दूसरे को अनमोल समझें, एक-दूसरे की परवाह करें, एक-दूसरे से प्रेम करें और मेल-मिलाप से रहें। मैं ईमानदारी से आशा करती हूं कि आप सभी एकता में रहकर प्रचुर फल उत्पन्न करें और जब स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करें, तो धर्म का मुकुट और अनेक स्वर्गीय पुरस्कार प्राप्त करें।