पिता ने कहा, “सेनाएं तुरही की आवाज पर आगे बढ़ती हैं, और परमेश्वर की सन्तान भविष्यवाणी की आवाज पर आगे बढ़ती हैं।” आज दुनिया मीडिया के माध्यम से और पर्यावरण संकट के बारे में बताने वाले विशेषज्ञों के जरिए अनगिनत चेतावनियां दे रही है। ऐसे समय में हमें परमेश्वर की उन भविष्यवाणियों को ध्यान से सुनना चाहिए जिनमें पहले ही बताया गया है कि ये सब बातें होंगी, और यह विचार करना चाहिए कि अब हमें क्या करना चाहिए।
बाइबल हमें बताती है कि जाति पर जाति, और राज्य पर राज्य चढ़ाई करेगा, और भूकम्प होंगे और कई प्रकार की विपत्तियां आएंगी(मत 24:7-8)। जब हम इन भविष्यवाणियों को पूरा होते हुए देखते हैं, तब हमें यह एहसास होता है कि हमारा शेष कार्य यह है कि हम स्वर्गीय परिवार के शेष सदस्यों को लगन से खोजें और उन्हें पश्चाताप की ओर ले जाएं। यशायाह भविष्यद्वक्ता के माध्यम से, परमेश्वर ने घोषित किया: “सुनो, यहोवा पृथ्वी को निर्जन और सुनसान करने पर है, वह उसको उलटकर उसके रहनेवालों को तितर बितर करेगा”(यश 24:1)। पृथ्वी पर इन विपत्तियों के आने का कारण यह है कि उन्होंने सनातन वाचा को तोड़ दिया है(यश 24:1-5)। इन आत्माओं को बचाने का एकमात्र मार्ग सनातन वाचा अर्थात् नई वाचा है। हमें उन्हें उनके हाल पर नहीं छोड़ना चाहिए। अभी हमारा काम यह है कि हम उन्हें शीघ्र सिय्योन की ओर भागने में सहायता करें(यिर्म 4:5-6)।
यदि कोई पहरेदार किसी चोर को आते हुए देखे और नरसिंगा न फूंके, तो क्या होगा? जब विपत्ति निकट आ रही है, तब हम ही वे पहरेदार हैं जिन्हें चेतावनी का नरसिंगा फूंकना चाहिए। हमें अपने पड़ोसियों से सुरक्षित स्थान, सिय्योन में आने के लिए कहना चाहिए। हम भी अपने पापों के कारण मरने वाले पापी थे, फिर भी परमेश्वर ने अपने मांस और लहू के द्वारा हमें बचाया। उन्होंने हमें जीवन देने के लिए क्रूस की पीड़ा को सहन किया और स्वयं को बलिदान किया। परमेश्वर, जो प्रेम हैं, उनके नमूने का पालन करते हुए, हमें भी गरीब आत्माओं की सिय्योन की ओर अगुवाई करनी चाहिए और उन्हें पश्चाताप की ओर ले आना चाहिए। आइए हम जोर देकर कहें, “जल्दी सुरक्षित स्थान सिय्योन में आओ।” भले ही हमने उन्हें पहले बताया हो, लोग किसी बात को केवल एक बार सुनकर भूल जाते हैं। हमें उन्हें बार-बार, पूरे मन और ईमानदारी से बताना चाहिए। जो लोग सच्चे प्रेम से इस संदेश को लगातार सुनाते रहते हैं, वे अच्छे फल उत्पन्न करेंगे।
हम संदेश तभी बांट सकते हैं जब हमारे भीतर प्रेम हो। यदि प्रेम न हो, तो हम बोलेंगे ही नहीं। दयालु सामरी ने अपनी यात्रा के दौरान एक मरते हुए व्यक्ति को बचाया, क्योंकि उसे उस पर दया आई। याजक और लेवी ने उस व्यक्ति को देखा, फिर भी वे उसे अनदेखा करके चले गए, जिससे उनके भीतर प्रेम का अभाव प्रकट हुआ। परन्तु जब सामरी ने उस घायल और लहूलुहान व्यक्ति को देखा, तो उस पर दया आई। एक सच्चा भला मनुष्य दूसरे के दर्द को अपना ही दर्द समझता है। उसने उस घायल व्यक्ति को अपनी सवारी पर चढ़ाकर सराय में ले गया, उसके घावों का उपचार किया और उसके ठीक होने तक उसकी देखभाल की(लूक 10:25-37)। आइए हम सब दयालु सामरी की तरह दयालु मनुष्य बनें।
चूंकि हमें जागते रहने के लिए कहा गया है(मर 13:33-37), इसलिए नई वाचा के सेवक के रूप में हमें सुसमाचार के प्रचार में और भी अधिक समर्पित होना चाहिए। यह कहने के बजाय, “मैं इसे कल करूंगा,” आइए हम आज परिश्रम से कार्य करें(नीत 27:1)। विपत्तियों के इस युग में, फसह ही उपाय है। पिता ने हमसे यह भी कहा है, “जब विपत्तियां बढ़ें, तो फसह के बारे में और भी अधिक सिखाओ।” विपत्तियों को दूर करने का एकमात्र तरीका परमेश्वर का मांस और लहू है। आइए हम बहुत से लोगों को फसह मनाने में सहायता करें और उनके जीवन बचाएं जिसके द्वारा हम परमेश्वर का मांस और लहू प्राप्त करते हैं। यह लिखा है कि जो बहुत से लोगों की अगुवाई परमेश्वर की ओर करते हैं, वे सर्वदा तारों के समान प्रकाशमान रहेंगे(दान 12:3)।
हमें स्वयं को ऐसी परिस्थितियों में नहीं रखना चाहिए जो हमारे विश्वास को हिलाएं या हमें परमेश्वर पर विश्वास करने और सुसमाचार का प्रचार करने से रोकें। परमेश्वर ने आदम को भले और बुरे के ज्ञान के वृक्ष का फल न खाने की आज्ञा दी। फिर भी जब जिज्ञासा उसे उसके निकट ले गई, तो अंततः उसने उसका फल खा लिया। यदि हम निकट जाएंगे, तो देखेंगे; और यदि हम देखेंगे, तो प्रलोभन में पड़ सकते हैं। इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि हम एक बार भी न जाएं और एक बार भी न देखें। जो लोग परमेश्वर के वचन का पालन करते हैं, अपने आप को तैयार रखते हैं और उचित समय पर भोजन देते हैं, परमेश्वर उन्हें स्वर्ग के राज्य की विरासत देंगे(मत 24:37-47)। विपत्ति से बचने का मार्ग, फसह को परिश्रमपूर्वक साझा करना और दूसरों को उसे मानने में सहायता करना उसी तैयारी का एक भाग है।
हम केवल लोगों को नहीं खोज रहे हैं; हम अपने स्वर्गीय परिवार को खोज रहे हैं। जब माता-पिता अपने बच्चे को खो देते हैं, तो वे अपनी भूख या थकान की परवाह किए बिना उसका नाम पुकारते हुए बेताबी से उसे ढूंढ़ते रहते हैं। कोई भी आधे-अधूरे मन से नहीं ढूंढ़ता। और जब अंत में उन्हें अपना खोया हुआ बच्चा मिल जाता है, तो उनकी खुशी शब्दों से परे होती है। सुसमाचार के लिए हमारे पास यही हृदय होना चाहिए। विपत्तियां आने से पहले, आइए हम एक और आत्मा की अगुवाई उद्धार की ओर करें। आइए हम बहुतों को पश्चाताप की ओर लाएं और हाथों में हाथ डालकर हम सब एक साथ स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करें।