सुबह और शाम को प्रार्थना करने और लगन से सुसमाचार का प्रचार करने में आप सभी ने जो परिश्रम किया है, उसके लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। ऐसा लगता है कि पूरे संसार में सभी लोग एक मन होकर बड़े उत्साह से प्रचार कर रहे हैं। वास्तव में, अपने स्वर्गीय परिवार को ढूंढ़ने से अधिक आनंद हमें किसी और बात से नहीं मिलता। स्वर्गीय परिवार को ढूंढ़ने की कहानियां कितनी सुंदर और मधुर हैं।
सुसमाचार का प्रचार करना कितना आनंदमय और अद्भुत कार्य है। एक आत्मा को बचाने से हमें खुशी मिलती है, और प्रचार करते हुए हम बहुत हंसते हैं और आनंद भी बांटते हैं। जब हम एक आत्मा को बचाते हैं, तो केवल वही आत्मा उद्धार नहीं पाती, बल्कि हम स्वयं भी उद्धार पाते हैं। और जब हम स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करेंगे, तो पिता से प्रतिफल भी पाएंगे। पिता ने कहा, “हर एक के काम के अनुसार बदला देने के लिये प्रतिफल मेरे पास है”(प्रक 22:12)। आइए हम पिता को धन्यवाद दें जो हमें अनन्त मृत्यु से बचाकर स्वर्ग के राज्य की ओर हमारी अगुवाई करते हैं और हमें उस महिमा में प्रवेश करने की अनुमति देते हैं जहां हम पूरे ब्रह्मांड की यात्रा करते हुए तारों की दुनिया को देख सकेंगे।
बाइबल कहती है, “विश्वास बिना उसे प्रसन्न करना अनहोना है; क्योंकि परमेश्वर के पास आनेवाले को विश्वास करना चाहिए कि वह है, और अपने खोजनेवालों को प्रतिफल देता है”(इब्र 11:6)। विश्वास के अनेक नबियों के द्वारा परमेश्वर ने हमें दिखाया है कि जब हम अपने विश्वास के अनुसार कार्य करें, तब हम चमत्कारों को देख सकते हैं। नूह, अब्राहम, मूसा, दानिय्येल और उसके तीन मित्र… उन्होंने चमत्कार इसलिए नहीं देखे कि वे हमसे अलग थे। उन्होंने केवल अपने विश्वास के अनुसार कार्य किया। उनके पास यह विश्वास था कि यदि वे परमेश्वर की इच्छा का पालन करेंगे, तो परमेश्वर उनकी रक्षा करेंगे, और जैसा उनका विश्वास है, वैसा ही होगा। यदि हमारे पास विश्वास है, तो हम भी ऐसे चमत्कार देख सकते हैं। इसीलिए हमारे पास दृढ़ विश्वास होना चाहिए। और विश्वास को अमल में लाना आवश्यक है। किसी बात को केवल जानने और उसे वास्तव में करने में अंतर होता है। क्या यह विश्वास रखते हुए कि हमारे परमेश्वर सृष्टिकर्ता हैं, परमेश्वर के वचन के अनुसार कार्य करना ही वास्तव में उन्हें प्रसन्न करने वाली बात नहीं होगी?
परमेश्वर के प्रति विश्वासयोग्य रहने में एक बात विशेष रूप से महत्वपूर्ण है: यदि हम विश्वास करते हैं, तो उसे अमल में लाएं। पिता ने हमें सिखाया कि हमें यह समझना चाहिए कि अपने विश्वास को अमल में लाना ही हमारे जीवन के हर पहलू का मार्गदर्शन करता है। प्रेरित पौलुस ने लिखा, “मनुष्य जो कुछ बोता है वही काटेगा। क्योंकि जो अपने शरीर के लिये बोता है, वह शरीर के द्वारा विनाश की कटनी काटेगा; और जो आत्मा के लिये बोता है, वह आत्मा के द्वारा अनन्त जीवन की कटनी काटेगा”(गल 6:7–8)। जब हमारे भीतर शरीर के विचार उठते हैं, तो वे हमें परमेश्वर के वचन की अवज्ञा करने की ओर ले जा सकते हैं। परमेश्वर इसे बहुत नापसंद करते हैं। उन्होंने कहा कि जो गुनगुने हैं, वे न तो गर्म हैं और न ठंडे, इसलिए वह उन्हें अपने मुंह से उगल देंगे(प्रक 3:16)। इसलिए आइए हम सचेत और जागते रहें। आइए हम विश्वास करें कि परमेश्वर का वचन हमें अनन्त जीवन देता है और उनके वचन का निष्ठापूर्वक पालन करें।
अब हम झोपड़ियों के पर्व के युग में हैं। बाइबल में भविष्यवाणी की गई है कि जो लोग झोपड़ियों का पर्व मनाने नहीं आते, उन पर विपत्तियां आएंगी(जक 14:12–13, 16–19; सपन 1:2–3, 14–17)। इसलिए झोपड़ियों के पर्व का पवित्र आत्मा आंदोलन निरन्तर जारी रहना चाहिए। हमें उद्धार की तुरही फूंकते हुए कहना चाहिए, “सिय्योन में आओ, परमेश्वर पर विश्वास करो, उनके पर्व मनाओ और जीवन पाओ,” और स्वर्ग के राज्य से खोए हुए अपने सभी स्वर्गीय परिवार को ढूंढ़ना चाहिए(योए 2:1–2)। आइए हम विश्वास करें कि झोपड़ियों के पर्व में परमेश्वर हमें पवित्र आत्मा देते हैं। जब हम इस दृढ़ विश्वास के साथ प्रचार करते हैं कि हमने पवित्र आत्मा प्राप्त किया है, तो हम फल उत्पन्न करेंगे। हमें दृढ़ता से विश्वास करना चाहिए कि जब हम झोपड़ियों के पर्व के पवित्र आत्मा आंदोलन में भाग लेते हैं, तो हम अवश्य ही फल उत्पन्न करने के चमत्कार का अनुभव करेंगे।
यदि हम सनातन वाचा अर्थात् नई वाचा का फसह नहीं मनाते, तो हम अनन्त जीवन प्राप्त नहीं कर सकते। फिर भी कुछ लोग केवल इसलिए फसह नहीं मनाते क्योंकि वे उसके बारे में नहीं जानते। इसलिए हमें उन्हें उसके बारे में बताना चाहिए(यश 24:1–5; लूक 22:19–20; रो 10:13–15)। यदि वे वचन न सुन पाने के कारण उद्धार नहीं पा सकते, तो उन्हें वचन का प्रचार न करने की जिम्मेदारी भी हम पर आती है। हमें स्पष्ट रूप से तुरही फूंकनी चाहिए, ताकि उसे सुनने वाले वचन को ठीक से समझ सकें, उस पर विश्वास कर सकें और उसे अमल में ला सकें(1कुर 14:8–9)। आइए हम पूरे मन से प्रचार करें, “सिय्योन में आओ, विपत्तियों से बचो और अनन्त जीवन प्राप्त करो।”
जब नाश की ओर जा रही बहुत सी आत्माओं की अगुवाई पश्चात्ताप और उद्धार की ओर की जाती है, तब परमेश्वर सबसे अधिक प्रसन्न होते हैं। परमेश्वर को प्रसन्न करने के लिए हमें विश्वास चाहिए, और यही विश्वास हमें लगन से सुसमाचार की तुरही फूंकने के लिए प्रेरित करता है। आइए हम उद्धार की तुरही स्पष्ट रूप से फूंकें और सबको उद्धार के जहाज, सिय्योन में आने के लिए कहें, ताकि वे विपत्तियों से बच सकें और अनन्त जीवन प्राप्त कर सकें। मैं आशा करती हूं कि आप स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करने के दिन तक परमेश्वर को प्रसन्न करने वाले बहुत से अच्छे फल निरन्तर उत्पन्न करते रहें और पवित्र आत्मा बहुतायत से प्राप्त करें।