आइए हम प्रेम बोएं और प्रेम का फल काटें

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मैं सुसमाचार के लिए अथक परिश्रम करने वाले सभी सदस्यों का हृदय से धन्यवाद करती हूं। आप बहुतायत से आशीषें प्राप्त करें, और स्वर्ग की आशा को दृढ़ता से थामे रखते हुए हमेशा हौसला रखें।

परमेश्वर ने कहा है कि मनुष्य जो कुछ बोता है वही काटेगा(गल 6:7)। हम सुसमाचार के लिए जितना अधिक परिश्रम, समर्पण और बलिदान करते हैं, स्वर्ग के राज्य में हमारे लिए उतनी ही अधिक आशीषें जमा होती हैं। यदि हम लापरवाह होते हैं, तो हमें मिलने वाली आशीषें भी उसी अनुसार कम होंगी। आइए हम इस बात पर विचार करते हुए स्वयं की जांच करें कि हममें क्या कमी है और क्या हमने सुसमाचार के सेवक के रूप में अपना मिशन सचमुच पूरा किया है। सच्चे आत्मचिंतन के माध्यम से, आइए हम पूर्ण और परिपक्व विश्वास तक पहुंचने का प्रयास करें।

परमेश्वर ने हमें सिखाया है कि स्वर्ग में पुरस्कार हैं(प्रक 22:12)। जब हम उस हृदय के साथ सेवा करते हैं कि, “परमेश्वर ने मेरे लिए स्वयं को बलिदान किया है, इसलिए मैं भी उनके अनुग्रह का बदला चुकाने के लिए बलिदान करूंगा,” तब हम निश्चय ही पुरस्कार प्राप्त करेंगे। हम केवल पुरस्कार के लिए सेवा नहीं करते, लेकिन जब हम स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करेंगे, तो क्या यह अच्छा नहीं होगा कि हमें पुरस्कार मिले? आइए हम कुछ समय निकालकर आत्म-परीक्षण करें और इस बात पर विचार करें कि हमने सुसमाचार के लिए कितना बलिदान और प्रेम बोया है। इस संकल्प के साथ कि, “यदि मुझे स्वर्ग में बहुत अधिक पुरस्कार प्राप्त करने हैं, तो मुझे कम से कम इतना तो अवश्य करना चाहिए,” हम स्वयं को अनुशासित करते हुए स्वर्ग की ओर निरंतर आगे बढ़ सकते हैं। ऐसा विश्वास जो हमें संकल्प और आत्म-चिंतन के साथ निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है, अच्छा और प्रशंसनीय है। आइए हम निरंतर स्वयं की जांच करें और इस प्रकार का विश्वास विकसित करें, ताकि हम परमेश्वर आन सांग होंग द्वारा प्रेम किए जाने वाले सदस्य बन सकें।

परमेश्वर के पुत्र और पुत्रियां बनना वास्तव में एक असाधारण आशीष है। परमेश्वर ने प्रतिज्ञा की है कि हम स्वर्ग के राज्य में राज-पदधारी याजक बनेंगे(1पत 2:9)। इस कारण, हमें जो कुछ मिला है उसे कभी तुच्छ नहीं समझना चाहिए, बल्कि उसे दृढ़ता से थामे रखना चाहिए।

तू ने मेरे धीरज के वचन को थामा है, इसलिये मैं भी तुझे परीक्षा के उस समय बचा रखूंगा… मैं शीघ्र ही आनेवाला हूं; जो कुछ तेरे पास है उसे थामे रह कि कोई तेरा मुकुट छीन न ले। जो जय पाए उसे मैं अपने परमेश्वर के मन्दिर में एक खंभा बनाऊंगा, और वह फिर कभी बाहर न निकलेगा… प्रक 3:10-12

परमेश्वर के लोगों के रूप में, हमें न केवल अपने विश्वास को बनाए रखना चाहिए, बल्कि परमेश्वर के प्रत्येक वचन का पालन भी करना चाहिए। हमें विनम्र, भक्तिमय और पवित्र होना चाहिए। हमें भाईचारे का प्रेम रखना चाहिए और मर रही अनेक आत्माओं के प्रति करुणा रखनी चाहिए। जब भाई-बहन अपने हृदय में असंतोष को बनाए रखते हैं और आपस में झगड़ते हैं, तो ऐसा अनुचित व्यवहार उस समय को छीन लेता है, जो परमेश्वर के प्रति विश्वासयोग्यता में समर्पित होना चाहिए। हमें अनेक लोगों के सामने परमेश्वर की महिमा प्रकट करने के लिए बुलाया गया है। यदि हम इस बुलाहट की उपेक्षा करते हैं, तो इससे हमें दिया गया वरदान खो सकता है।

इसलिए, आइए हम अपनी आशीषों को दृढ़ता से थामे रखें, परमेश्वर के पुत्रों और पुत्रियों के योग्य जीवन जिएं, और उत्साह तथा परिश्रम के साथ आगे बढ़ें। इसी कारण से, पिता हमें सिखाते हैं कि हम जो कुछ बोते हैं वही काटते हैं। जब हम प्रेम बोते हैं, तो हम प्रेम की संतान के रूप में बहुतायत से फल उत्पन्न करते हैं। जब हम अच्छे और अनुग्रहपूर्ण शब्द बोलते हैं, तो अनुग्रह के शब्द फैलते हैं और भाई और बहनों के बीच के नकारात्मक व्यवहार भी बेहतर के लिए बदल सकते हैं। अच्छे शब्द सुनने और अच्छे कार्यों को देखने से, लोग ऐसे उदाहरणों का अनुसरण करने के लिए प्रेरित होते हैं। क्या परमेश्वर हमें यही नहीं सिखा रहे हैं कि केवल उनके द्वारा दिए गए प्रत्येक वचन को दृढ़ता से थामे रखने के द्वारा ही हम अनंत स्वर्ग के राज्य तक पहुंच सकते हैं?

आइए हम प्रेम बोएं और सत्य बोएं, और प्रेम के साथ अनेक लोगों का मार्गदर्शन करें। जब हम स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करेंगे, तब हम प्रेम का पुरस्कार और उत्साह का पुरस्कार प्राप्त करेंगे। स्वर्ग में बहुत सारे पुरस्कार तैयार किए गए हैं। हम इस पृथ्वी पर जो कुछ बोते हैं, उसी के अनुसार काटते हैं। जैसे हम इस पृथ्वी पर पुरस्कार प्राप्त करने पर आनंदित होते हैं, वैसे ही जब हम स्वर्ग में पुरस्कार प्राप्त करेंगे तो हम और भी अधिक आनन्दित होंगे। चूंकि परमेश्वर ने यह प्रतिज्ञा की है, इसलिए हमें जो पुरस्कार मिलेगा या जिसे हम खो देंगे, वह इस बात पर निर्भर करता है कि हम क्या बोते हैं। इसलिए, आइए हम अपने पुरस्कारों को न खोएं, बल्कि उन्हें प्रचुर मात्रा में प्राप्त करें। आप अधिक प्रेम और अधिक सत्य बोएं, बहुत सारे अच्छे फल उत्पन्न करें, और स्वर्ग के राज्य में पिता से बहुत से पुरस्कार प्राप्त करें।

आपको एक-दूसरे से प्रेम करते हुए, एक-दूसरे की सहायता करते हुए, और सुसमाचार के लिए मिलकर कार्य करते हुए देखना वास्तव में अत्यंत सुंदर है। ऐसा प्रेम बोने का फल ही वह पुरस्कार होगा, जो आप स्वर्ग में पिता से प्राप्त करेंगे। आप निरंतर परिश्रमपूर्वक प्रेम बोते रहें और प्रेम के फल बहुतायत से उत्पन्न करें। मैं आपको तहे दिल से धन्यवाद देती हूं। मैं आपसे बहुत प्रेम करती हूं।